Pakistan Budget Development: पाकिस्तान सरकार ने आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास खर्चों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. सीमित संसाधनों के बीच अब केवल उन्हीं परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा जो राष्ट्रहित में हों और जिनसे पूरी लागत वसूली की उम्मीद हो. इस नई नीति का उद्देश्य फिजूलखर्ची पर लगाम लगाते हुए देश की आर्थिक स्थिति को स्थिरता की ओर ले जाना है.
योजना मंत्री अहसान इकबाल ने सोमवार को इस्लामाबाद में जानकारी दी कि नए बजट में कुल 1 ट्रिलियन रुपये का विकास बजट प्रस्तावित है, लेकिन इसमें से 120 अरब रुपये बलूचिस्तान की N-25 हाईवे को एक्सप्रेसवे में बदलने के लिए अलग रखे गए हैं. इसके बाद शेष 880 अरब रुपये से पूरे देश का PSDP (Public Sector Development Programme) संचालित किया जाएगा.
बजट का फोकस: अधूरी नहीं, पूरी होने के कगार पर परियोजनाएं
सरकार अब उन योजनाओं को वरीयता देगी जो 70-80% तक पूरी हो चुकी हैं, ताकि उन्हें जल्द पूरा कर देश के विकास पोर्टफोलियो को सशक्त किया जा सके. ‘टोकन आवंटन’ यानी नाम के लिए मामूली राशि देकर योजनाओं को अधर में लटकाए रखने की नीति अब खत्म की जा रही है.
विभिन्न क्षेत्रों में बजट का वितरण इस प्रकार है
ऊर्जा, जल और सड़क परियोजनाएं: ₹664 अरब. गिलगित-बाल्टिस्तान व आजाद कश्मीर: ₹63 अरब. खैबर पख्तूनख्वा के विलय क्षेत्र: ₹70 अरब. विज्ञान और आईटी: ₹53 अरब. इकबाल ने यह भी बताया कि 1000 अरब रुपये लागत वाली 118 योजनाओं को फिलहाल कम प्राथमिकता की सूची में डाला गया है. इनमें से कई को स्थगित या बंद किया जाएगा. केंद्र अब केवल रणनीतिक और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जबकि राज्य स्तर की परियोजनाएं प्रांतीय सरकारों को सौंपी जाएंगी.
कम टैक्स वसूली बना सबसे बड़ा रोड़ा
योजना मंत्री ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान की टैक्स-टू-GDP रेशियो सिर्फ 10% है, जो विकास के लिए अपर्याप्त है. इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला बताते हुए उन्होंने सुधारों की तत्काल जरूरत जताई.
आर्थिक लक्ष्य और शिक्षा में सुधार की दिशा
सरकार ने वर्ष 2025 में 4.2% GDP वृद्धि का लक्ष्य तय किया है, जो कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के योगदान से हासिल करने की योजना है. साथ ही विदेशों से 39 अरब डॉलर की आमदनी और 35 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ते पाकिस्तान को लेकर इकबाल ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा में नामांकन दर भारत और बांग्लादेश से भी कम है. इसके समाधान के लिए हाई एजुकेशन बजट को तीन गुना बढ़ाने की बात कही गई है.
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