Fordo nuclear radiation: इजरायल के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दशकों से रहस्य बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि इजरायल के पास 80 से 400 परमाणु बम हो सकते हैं, हालांकि इजरायल ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि या इनकार नहीं किया है। यह देश अपनी परमाणु अस्पष्टता (nuclear ambiguity) नीति पर कायम है, जिसके तहत वह न तो अपने परमाणु हथियारों के बारे में जानकारी देता है और न ही इनके परीक्षण की पुष्टि करता है।
इजरायल की परमाणु क्षमता
- वायु सेना के जरिए हमला:
इजरायल के F-15 और F-16 लड़ाकू विमान परमाणु बम गिराने में सक्षम हैं। - पनडुब्बियों से मिसाइल दागने की क्षमता
डॉल्फिन-क्लास पनडुब्बियों से लॉन्च की जाने वाली क्रूज मिसाइलें भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। - बैलिस्टिक मिसाइलों की ताकत:
जेरिको श्रृंखला की मध्यम से अंतरमहाद्वीपीय रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल को दूरी वाले लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता प्रदान करती हैं। बैलिस्टिक मिसाइल खुद से दिशा चयन करने में सक्षम होता है।
फोर्डो पर हमले के संभावित परिणाम
इजरायल ने हाल ही में ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हमला किया है, जिसमें नतान्ज़ और इस्फ़हान शामिल हैं, लेकिन फोर्डो सुविधा अब तक सुरक्षित बनी हुई है।
फोर्डो एक भूमिगत सुविधा है, जो एक पहाड़ के नीचे 80 मीटर की गहराई में बनी हुई है और इसे नष्ट करना बेहद मुश्किल है।
ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र पर हमले से विनाशकारी रेडिएशन फैलने का खतरा
अगर इजरायल या अमेरिका ईरान के फोर्डो भूमिगत न्यूक्लियर प्लांट पर हमला करता है, तो इससे न केवल एक बड़ा विस्फोट होगा, बल्कि रेडियोएक्टिव रेडिएशन का एक विशाल बादल भी फैल सकता है, जो पूरे मिडिल ईस्ट के लिए विनाशकारी होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में हजारों लोग तत्काल मारे जा सकते हैं, जबकि लाखों लोग लंबी अवधि रेडिएशन के प्रभावों का शिकार हो सकते हैं।
तत्काल प्रभाव: 10 सेकंड में विनाश
1.विस्फोट और आग का गोला: एक परमाणु विस्फोट के बाद पहले 10 सेकंड में ही एक विशाल आग का गोला बनता है, जो सैकड़ों मीटर के दायरे में सब कुछ भाप बना देता है।
2.शॉकवेव: 800 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार वाली विस्फोटक लहरें इमारतों को गिरा देती हैं और दूर तक लोगों के फेफड़े फाड़ सकती हैं।
3.थर्मल रेडिएशन: इतनी तेज गर्मी पैदा होती है कि कई किलोमीटर तक लोगों की त्वचा जल सकती है और जंगल-शहर आग की चपेट में आ सकते हैं, लोग वास्पीकृत भी हो सकते हैं।
4.रेडिएशन का प्रसार: प्लांट में मौजूद यूरेनियम के रिसाव से रेडिएशन का बादल हवा के साथ 50-100 किमी तक फैल सकता है।
5.दीर्घकालिक प्रभाव: आसपास के इलाके दशकों तक रहने लायक नहीं रहेंगे, जैसा कि 1986 में चेरनोबाइल दुर्घटना के बाद हुआ था।
6.अंतरराष्ट्रीय प्रभाव:रेडिएशन का बादल पड़ोसी देशों इराक, तुर्की, पाकिस्तान और खाड़ी देशों तक पहुंच सकता है।
- स्वास्थ्य संकट
कैंसर और जन्मजात विकृतियां, रेडिएशन के संपर्क में आए लोगों में ल्यूकेमिया, थायरॉयड कैंसर और आनुवंशिक विकार बढ़ सकते हैं।
8.पर्यावरणीय विनाश: ईरान और मिडिल ईस्ट के खेतों और पानी के स्रोत दूषित होने का डर है
परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध संधि
संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु हथियारों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने वाली ऐतिहासिक संधि (TPNW) को लागू कर दिया है। यह संधि 7 जुलाई 2017 को 122 देशों के समर्थन से पारित हुई थी और 24 अक्टूबर 2020 को 50वें देश के अनुमोदन के बाद 22 जनवरी 2021 से प्रभावी हो गई।
मुख्य बाते
- परमाणु हथियारों के विकास, परीक्षण, उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध
- किसी भी देश को अपनी भूमि पर परमाणु हथियार तैनात करने या दूसरों को सहायता देने से रोक
- परमाणु परीक्षण से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के पुनर्वास का प्रावधान
भारत और अन्य देशों की स्थिति:
- भारत, अमेरिका, रूस और चीन जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
यह संधि परमाणु हथियारों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव तभी होगा जब सभी बड़ी शक्तियां इसे अपनाएंगीसे खाद्य संकट पैदा हो सकता
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