Iran and Israel Nuclear Deal: क्या युद्ध के बाद ईरान से परमाणु डील के लिए तैयार हुए ट्रंप? किस ओर इशारा कर रहा उनका ये बयान

Iran and Israel Nuclear Deal

Iran and Israel Nuclear Deal: इज़रायल और ईरान के बीच हालिया संघर्षविराम के बाद, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम बयान दिया है. उन्होंने संकेत दिया है कि अगले सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत संभव है और दोनों देश किसी समझौते पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस डील का होना जरूरी नहीं है.

नीदरलैंड्स में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, मेरे नज़रिए से उन्होंने (ईरान-इज़रायल) युद्ध किया और अब वह समाप्त हो चुका है. मुझे उनका एक बयान मिल सकता है जिसमें वे कहें कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे. हम शायद इसे स्वीकार करें, लेकिन जरूरी नहीं कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें.

खामेनेई का पलटवार: अमेरिका पर कूटनीतिक विश्वासघात का आरोप

ट्रंप के इस बयान से ठीक पहले, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इज़रायल के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई कर के कूटनीति के साथ धोखा किया है, और अब वॉशिंगटन के साथ आगे कोई बातचीत संभव नहीं है.

ईरान की परमाणु साइट्स पर हमला “जरूरी” था

अपने संबोधन में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की परमाणु सुविधाओं पर किए गए अमेरिकी हमले आवश्यक थे. उन्होंने कहा कि इन हमलों ने तेहरान की उस क्षमता को गंभीर रूप से बाधित किया, जिसके माध्यम से वह परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त समृद्ध यूरेनियम हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा था. हालांकि, अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का आकलन इस बयान से थोड़ा अलग रहा. लीक हुए खुफिया दस्तावेज़ों में कहा गया है कि इन हमलों से केवल कुछ महीनों की देरी हुई है और ईरान की परमाणु क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा.

रक्षा सचिव हेगसेथ का समर्थन, लेकिन खुफिया आंकड़ों पर सवाल

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ट्रंप के दावे का समर्थन करते हुए कहा कि लीक हुए आकलन प्रारंभिक हैं और इनमें सीमित जानकारी है. उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रभाव इससे अधिक हो सकता है और अमेरिका की रणनीति को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए.

गायब यूरेनियम की तलाश में अमेरिका-इज़रायल

इस बीच, अमेरिका और इज़रायल की एजेंसियां अब 400 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम की तलाश में जुटी हैं, जो रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में मौजूद था. यह यूरेनियम लगभग 60% संवर्धित है, और यदि इसे 90% स्तर तक लाया जाए, तो यह कम से कम 10 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त होगा. इस यूरेनियम का गायब होना अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गया है.

नज़रें आगे की वार्ता पर

जहां एक ओर वॉशिंगटन से वार्ता के संकेत दिए जा रहे हैं, वहीं तेहरान का रूख सख्त दिखाई दे रहा है. आने वाले सप्ताहों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका और ईरान राजनयिक बातचीत की टेबल पर लौटते हैं, या हालात एक बार फिर तनाव की ओर मुड़ते हैं.

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  • Akash Singh

    पत्रकारिता के इस क्षेत्र में पांच सालों में काफी कुछ सीखने मिला. खबरों को सटीक और सरलता से समझने का हुनर. राजनीति करने का नहीं लिखने का शौक. निरंतर नई चीजें सीखने का प्रयास और उसपर अमल करना यह सिलसिला यूं ही आगे भी चलता रहेगा.

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