टीवी की ग्लैमरस दुनिया में अपनी खास पहचान बना चुकीं निया शर्मा आज ‘लाफ्टर शेफ्स 2’ में अपनी कॉमिक टाइमिंग और एनर्जी से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही हैं। लेकिन सफलता की ये चमकदार तस्वीर किसी रातों-रात नहीं बनी। इसके पीछे छिपी है वो कहानी, जिसमें संघर्ष, आंसू और अकेलेपन के कई पन्ने हैं।
दरअसल, निया कभी भी एक्टिंग में आना नहीं चाहती थीं। उनका सपना था पत्रकार बनना। कैमरा, माइक, रिपोर्टिंग — यही थी उनकी दुनिया। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद बताया कि कैसे एक दोस्त उन्हें ‘बस यूं ही’ ऑडिशन पर ले गया और वहीं से उनकी किस्मत बदल गई।



“मैंने तो मम्मी के लिए गिफ्ट खरीद लिए थे और वापस दिल्ली जाने ही वाली थी, तभी अचानक स्टार प्लस से कॉल आया – ‘हजारों में मेरी बहना है’ के लिए लॉक हो गई हो”, निया ने बताया।
पर शो मिलने का मतलब ये नहीं कि जिंदगी आसान हो गई थी। निया ने बताया कि जब उनकी को-एक्टर के पास गाड़ी थी, तब वह एक छोटे से पीजी में रहती थीं, जिसमें ना लिफ्ट थी, ना कोई सुविधा। एक रूम का फ्लैट, ऊपर से इंडियन टॉयलेट और घर ऐसा कि दरवाजा खुलते ही उनका बेड दिख जाए।
“मैं ऐसे पीजी में रही हूं, जहां घर का ओनर सामने वाले रूम में रहता था और मैं बस एक बेड पर सोती थी, गेट खुलते ही दिख जाती थी”, निया ने कहा।
निया ने अपनी को-स्टार के नॉनस्टॉप पार्टीज़ का भी जिक्र किया, जो रात भर दोस्तों के साथ जश्न मनाती थी, जबकि निया को सुबह-सुबह शूट पर निकलना होता था।







“मुझे सुबह 8:30 बजे सेट पर जाना होता था, लेकिन पार्टीज रात 3 बजे तक चलती थीं। मेरी नींद छिन जाती थी। कई बार मैं बालकनी में बैठकर चुपचाप रोती थी”, निया ने याद करते हुए कहा।





