स्कूलगर्ल से शादीशुदा महिलाएं तक, 100+ लड़कियों से गैंगरेप; पोल्लाची की वो कहानी जो रोंगटे खड़े कर देगी!

तमिलनाडु का पोल्लाची, कोयंबटूर से करीब 40 किलोमीटर दूर बसा एक शांत और खूबसूरत कस्बा, जो अपनी हरियाली और सुकून के लिए जाना जाता है। लेकिन, 2019 में एक ऐसी घटना ने इस शांति को चकनाचूर कर दिया, जिसने न सिर्फ पोल्लाची, बल्कि पूरे तमिलनाडु को हिलाकर रख दिया। एक 19 साल की कॉलेज छात्रा की हिम्मत और उसके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत ने एक ऐसे जघन्य अपराध का पर्दाफाश किया, जिसे ‘पोल्लाची कांड’ के नाम से जाना गया। इस मामले ने 2019 के लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु की सियासत को भी गरमा दिया।

छह साल बाद, 13 मई 2025 को कोयंबटूर की विशेष महिला अदालत ने इस केस में फैसला सुनाया। सभी 9 दोषियों को कई-कई बार उम्रकैद की सजा दी गई। आखिर क्या था ये कांड? कैसे एक छात्रा की शिकायत ने पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया? और क्यों दोषियों को बार-बार उम्रकैद की सजा सुनाई गई? आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

उस 19 साल की छात्रा ने पुलिस को क्या बताया, जिसने पोल्लाची को दहला दिया?

24 फरवरी 2019 को पोल्लाची ईस्ट पुलिस स्टेशन में एक 19 साल की कॉलेज छात्रा अपने भाई के साथ पहुंची। उसने जो बताया, वो किसी भी इंसान का दिल दहला देने वाला था। छात्रा ने कहा, “फेसबुक पर किसी ने लड़की बनकर मुझसे दोस्ती की। उसने मुझे मिलने के लिए बुलाया। जब मैं वहां पहुंची, तो चार लड़कों ने मुझे जबरदस्ती कार में बिठा लिया। चलती कार में उन्होंने मेरे साथ छेड़छाड़ और गैंगरेप की कोशिश की। मैं चीखी-चिल्लाई, तो वो मुझे छोड़कर भाग गए। इस दौरान उन्होंने मेरी सोने की चेन भी छीन ली।”

छात्रा ने आगे बताया कि उन लड़कों ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बना लिए थे। इसके बाद उसे ब्लैकमेल कर यौन संबंध बनाने की धमकी दी गई। लेकिन छात्रा ने हार नहीं मानी। उसने अपने परिवार को सब कुछ बताया और हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत ने एक बड़े अपराधी गिरोह की परतें खोल दीं, जिसने कई लड़कियों और महिलाओं को अपना शिकार बनाया था।

कैसे हुआ ‘पोल्लाची कांड’ का खुलासा, जिसने स्कूलगर्ल्स से लेकर शादीशुदा महिलाओं को बनाया शिकार?

छात्रा की शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। जांच में पता चला कि सभी आरोपी पोल्लाची के ही रहने वाले थे। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइस जब्त किए। इन डिवाइसेज से कई लड़कियों और महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें बरामद हुईं। जांच में खुलासा हुआ कि ये गिरोह पिछले तीन साल (2016-2018) से संगठित तरीके से अपराध कर रहा था।

पहले स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की, फिर मामला क्राइम ब्रांच-CID को सौंपा गया। लेकिन जनता के आक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन AIADMK सरकार ने 25 अप्रैल 2019 को जांच CBI को सौंप दी। CBI की जांच ने इस कांड के पूरे नेटवर्क को उजागर किया।

CBI की जांच में क्या सामने आया?

इस कांड का मास्टरमाइंड था थिरुनावुक्कारासु, जिसके साथ 8 अन्य लोग मिलकर एक संगठित गिरोह चलाते थे। ये लोग फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर खुद को लड़की बताते और युवतियों से दोस्ती करते। जब कोई लड़की उनके झांसे में आ जाती, तो उसे मिलने के लिए बुलाया जाता। फिर सुनसान जगह पर ले जाकर गैंगरेप किया जाता।

अपराध का वीडियो बनाकर पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया जाता। उन्हें धमकी दी जाती कि अगर पैसे नहीं दिए या बार-बार उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो वीडियो वायरल कर दिए जाएंगे। इस गिरोह ने कॉलेज छात्राओं, स्कूलगर्ल्स, शिक्षिकाओं और कामकाजी महिलाओं समेत 100 से ज्यादा महिलाओं को निशाना बनाया।

एक आरोपी ने CBI को दिए बयान में अपनी बेशर्मी जाहिर की। उसने कहा, “जब मैंने उसे चूमा, तो उसने विरोध नहीं किया। फिर कपड़े उतारने पर विरोध क्यों?” इस मामले ने तमिलनाडु में भारी बवाल मचाया। जगह-जगह प्रदर्शन हुए और दोषियों को सख्त सजा की मांग उठी।

दोषियों पर किन धाराओं में मुकदमा चला?

पोल्लाची पुलिस ने सभी 9 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की 13 धाराओं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), और तमिलनाडु के यौन उत्पीड़न कानून (TNPHW) के तहत मामला दर्ज किया। प्रमुख धाराएं इस प्रकार थीं:


IPC धारा 34: साझा इरादे से अपराध करने पर सभी आरोपी बराबर दोषी।

IPC धारा 376D: गैंगरेप के लिए 20 साल से उम्रकैद तक की सजा।

IPC धारा 376(2)(N): बार-बार बलात्कार के लिए उम्रकैद।

IPC धारा 366: अपहरण कर यौन शोषण के लिए 10 साल तक की सजा।

IPC धारा 354-A और 354-B: यौन उत्पीड़न और निर्वस्त्र करने के लिए 3 से 7 साल की सजा।

IPC धारा 370: मानव तस्करी और शोषण के लिए 7 साल से उम्रकैद तक।

IPC धारा 509: महिला की गरिमा का अपमान करने के लिए 1 साल की सजा।

TNPHW धारा 4: महिलाओं के उत्पीड़न को बढ़ावा देने के लिए सजा।

IT Act धारा 66E और 67: अश्लील सामग्री के प्रसार के लिए सजा।

फैसला आने में 6 साल क्यों लगे?

मामले की जांच में कई चुनौतियां आईं। शुरुआत में स्थानीय पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे। कोयंबटूर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आर. पांड्याराजन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़िता का नाम उजागर कर दिया, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो गई। इस गलती ने मामले को और जटिल बना दिया।

अप्रैल 2019 में जांच CBI को सौंपी गई। CBI ने गहन जांच की, जिसमें 200 से ज्यादा दस्तावेज, 400 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, और 1500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। 8 पीड़िताओं और 48 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

2023 में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर कोयंबटूर की विशेष महिला अदालत में सुनवाई शुरू हुई। पीड़िताओं की गोपनीयता के लिए कोर्ट में कांच की दीवार बनाई गई। सभी गवाहों ने अपने बयान पर अडिग रहकर CBI की जांच को मजबूत किया।

13 मई 2025 को जस्टिस आर. नंदिनी देवी ने फैसला सुनाया। सभी 9 आरोपियों को IPC की 13 धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। प्रत्येक आरोपी को 1 से 5 बार उम्रकैद की सजा दी गई, जो मृत्यु तक चलेगी। इसके अलावा, 10 साल, 7 साल और 3 साल की अतिरिक्त सजाएं दी गईं। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। प्रत्येक आरोपी पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। 8 पीड़िताओं को 85 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

दोषियों को कई बार उम्रकैद क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी दुबे के मुताबिक, “जस्टिस नंदिनी ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को कई धाराओं में उम्रकैद की सजा दी। यह सुनिश्चित किया गया कि दोषी मृत्यु तक जेल में रहें और उन्हें कोई रियायत न मिले।” उदाहरण के तौर पर, दोषी टी. वसंत कुमार को धारा 376(2)(N) और धारा 370 के तहत दो बार उम्रकैद मिली।

इस मामले ने सियासत को कैसे प्रभावित किया?

इस कांड में एक आरोपी, के. अरुलानंदम, AIADMK की स्टूडेंट विंग का सचिव था। उसे 2021 में गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद पार्टी ने उसे निष्कासित कर दिया। 2019 में एक अन्य AIADMK सदस्य ए. नागराज को भी पीड़िता के भाई से मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। विपक्षी DMK ने AIADMK पर आरोपियों को बचाने और उनके वरिष्ठ नेताओं से संबंध होने का आरोप लगाया।


2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इन गिरफ्तारियों ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया। जांच के दौरान पीड़िता की पहचान उजागर होने से भी विवाद बढ़ा। हालांकि, CBI की जांच और कोर्ट के फैसले ने इस मामले में इंसाफ की उम्मीद जगाई।

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  • Aaj Ki Baat Desk

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