पहलगाम आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है। यह हमला सिर्फ सैनिकों पर नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता पर वार था। अब पूरा देश सवाल पूछ रहा है—क्या पाकिस्तान को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा? जवाब है, हां। भारत अपने दुश्मनों को यूं ही नहीं छोड़ता। इसका प्रमाण सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक से पहले ही दिया जा चुका है।
अब मैदान में उतरेगा इंदिरा गांधी का ‘शेर’—जगुआर
इस बार बदले की रणनीति में भारत के पास दो घातक हथियार हैं—राफेल और जगुआर।
- राफेल को मोदी सरकार की ताकत माना जाता है।
- और जगुआर, जिसे ‘इंदिरा का शेर’ कहा जाता है, वो 25 साल बाद फिर से दहाड़ने को तैयार है।
आखिरी बार 1999 के कारगिल युद्ध में इसने पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया था। अब यह फिर से मोर्चे पर लौट सकता है।
जगुआर: भारतीय वायुसेना का शमशेर
जगुआर भारतीय वायुसेना का मल्टी-रोल स्ट्राइक फाइटर जेट है।
- यह लो-लेवल फ्लाइंग के लिए मशहूर है, जिससे यह दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आता।
- इसका इस्तेमाल ग्राउंड अटैक, डीप पेनेट्रेशन स्ट्राइक, और टारगेटेड एयर अटैक में होता है।
- इसे भारतीय वायुसेना में प्यार से ‘शमशेर’ कहा जाता है।
इंदिरा गांधी ने रखी थी जगुआर की नींव
1971 के युद्ध के बाद भारत को एक ऐसे लड़ाकू विमान की जरूरत महसूस हुई, जो दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला कर सके। तभी इंदिरा गांधी ने ब्रिटिश-फ्रांसीसी SEPECAT Jaguar की खरीद प्रक्रिया शुरू की।
- 1978 में सौदा पक्का हुआ—भारत ने यूके की रॉयल एयर फोर्स से 18 जगुआर विमान खरीदे।
- भारत को एचएएल के ज़रिए लोकल मैन्युफैक्चरिंग का लाइसेंस भी मिला।
- 1979 में पहला जगुआर भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ।
हालांकि उस समय मोरारजी देसाई की सरकार थी, लेकिन डील की नींव इंदिरा गांधी के कार्यकाल में ही रखी गई थी।
कारगिल युद्ध में किया था कमाल
1999 के कारगिल युद्ध में जगुआर ने दुश्मन को घुटनों पर ला दिया था।
- इसने हाई-एल्टीट्यूड टारगेट्स पर लेजर-गाइडेड बमों और रॉकेट्स से अचूक वार किए।
- इसका प्रयोग टोही मिशनों और प्रेसिशन स्ट्राइक्स में हुआ।
- पाकिस्तान को इसका खौफ आज भी है।
आज भी बना हुआ है ताकत का प्रतीक
भले ही भारत के पास अब राफेल और तेजस जैसे अत्याधुनिक विमान हैं, लेकिन जगुआर को भी समय-समय पर अपग्रेड किया गया है। यह अब भी दुश्मन की सीमा के अंदर जाकर सर्जिकल वार करने में सक्षम है।
क्या फिर से गरजेगा जगुआर?
पहलगाम हमले के बाद माहौल युद्ध जैसा है। पूरी दुनिया देख रही है कि भारत कब और कैसे जवाब देगा।
- हो सकता है यह जवाब सीमित सैन्य कार्रवाई के रूप में हो।
- या फिर एक बार फिर ‘इंदिरा का शेर’ पाकिस्तान की जमीन पर दहाड़े।
एक बात तय है—भारत बदला जरूर लेगा। और उसमें जगुआर की गरज फिर सुनाई दे सकती है।





