PM Modi Cyprus Visit: प्रधानमंत्री के साइप्रस दौरे से कांपा पाकिस्तान, आतंकवाद को लेकर दिया सख्त संदेश; पॉइंट्स में समझे अपडेट्स

PM Modi Cannada visit

PM Modi Cyprus Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज साइप्रस की द्विदिवसीय आधिकारिक यात्रा पूरी की, जो 23 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश में पहली यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के संबंध ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद तनावपूर्ण हैं। साइप्रस, जो यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है, के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक सूझबूझ भरा कदम माना जा रहा है ।

यात्रा के प्रमुख बिंदु को समझते है

ऐतिहासिक स्वागत

  • साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिड्स ने हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी का स्वागत किया, जो दुर्लभ प्रोटोकॉल है।
  • पीएम को साइप्रस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ मकारियोस से नवाजा गया, जो भारत-साइप्रस संबंधों की मजबूती का प्रतीक है ।

3.आर्थिक सहयोग

दोनों देशों ने “कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप पर समझौता किया, जिसमें साइप्रस में भारतीय कंपनियों के लिए 500 मिलियन डॉलर के निवेशका लक्ष्य रखा गया. साइप्रस भारत के लिए यूरोप में एक लॉजिस्टिक्स हब बनने को तैयार है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच वैकल्पिक व्यापार मार्ग सुनिश्चित करेगा ।दोनों देशों ने “कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप पर समझौता किया, जिसमें साइप्रस में भारतीय कंपनियों के लिए 500 मिलियन डॉलर के निवेशका लक्ष्य रखा गया। साइप्रस भारत के लिए यूरोप में एक लॉजिस्टिक्स हब बनने को तैयार है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच वैकल्पिक व्यापार मार्ग सुनिश्चित करेगा ।

4. सुरक्षा समझौते

समुद्री सुरक्षा और साइबर अपराध रोकथाम पर गोपनीय समझौते हुए। साइप्रस, जो रूस के नजदीक माना जाता है, के साथ यह कदम अमेरिका को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का संकेत देता है ।

5.ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अमेरिकी नाराजगी और साइप्रस की रणनीतिक भूमिका

अमेरिका ने पाकिस्तान पर भारत की सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया था। इसके जवाब में भारत ने साइप्रस जैसे छोटे लेकिन यूएन सुरक्षा परिषद में प्रभावशाली देशों से संबंध मजबूत किए हैं। साइप्रस, यूरोप में रूसी समर्थक देश होने के नाते, भारत को पश्चिमी दबाव से बचाने में “बफर स्टेट” की भूमिका निभा सकता है ।

क्यों खास है ये यात्रा?

यह यात्रा ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के संबंध ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद तनावपूर्ण हैं। साइप्रस, जो यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है, के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक सूझबूझ भरा कदम माना जा रहा है ।
साइप्रस सरकार ने भारत को मध्य पूर्व और यूरोप के बीच सेतू बताया, जो अमेरिकी प्रभाव को कम करने की भारत की रणनीति को दर्शाता है ।

यह भी पढ़ें: Ahamdabad Plane Crash:टेक-ऑफ के तुरंत बाद एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त, पीएम मोदी और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने जताया शोक

The Ink Post Hindi: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Linkedin, Facebook, X और Instagram पर फॉलो कीजिए. Aaj Ki Baat: Facebook | Instagram | LinkedIn

Author

Scroll to Top