J-10C के शोर से कांप उठा ताइवान! चीन की चाल से अमेरिका भी सतर्क, पाकिस्तान क्यों उछल रहा है?

J-10C के शोर से कांप उठा ताइवान! चीन की चाल से अमेरिका भी सतर्क, पाकिस्तान क्यों उछल रहा है?

J-10C: भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में बढ़े सैन्य तनाव ने एक बार फिर दुनिया की निगाहें एशिया की वायु सेनाओं पर टिकाई हैं। इस बार चर्चा का केंद्र बना है चीन का J-10C फाइटर जेट, जिसे पाकिस्तान ने कथित तौर पर भारतीय ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में तैनात किया।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि इस लड़ाकू विमान का उपयोग कर उसने भारतीय वायुसेना को चुनौती दी, हालांकि इसके पक्ष में कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं दिए गए। इसके बावजूद यह साफ है कि J-10C अब केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि चीन की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षा का प्रतीक बन गया है।


J-10C: F-16 की छाया या नई चुनौती?

J-10C को अक्सर अमेरिका के प्रसिद्ध F-16 लड़ाकू विमान की चीनी प्रति कहा जाता है। माना जाता है कि इसकी तकनीक अमेरिकी डिफेंस सिस्टम से ली गई या चुराई गई है। हालांकि प्रदर्शन के स्तर पर यह विमान अमेरिका के F-22 या F-35 की बराबरी नहीं करता, लेकिन कुछ स्टील्थ क्षमताओं के साथ यह रडार पर कम दिखाई देता है।

चीन इसे एक ऐसे बहुपयोगी फाइटर जेट के रूप में पेश करता है जो सटीक हमले, तेज गति और एयर-टू-एयर कॉम्बैट में दक्ष है। यही कारण है कि अब यह विमान चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) के आधुनिकीकरण अभियान का अहम हिस्सा बन चुका है।


चीन का सैन्य विस्तार जारी, लेकिन अंदरूनी संकट भी गंभीर

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2027 तक PLA को विश्वस्तरीय सेना बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में J-10C, J-16 और J-20 जैसे विमानों का उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है।

हालांकि, चीन की सेना इस समय अंदरूनी संकटों से भी जूझ रही है। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया गया है। इसके बावजूद रक्षा क्षेत्र में निवेश और उत्पादन थमा नहीं है, जो बताता है कि बीजिंग अपने सैन्य मिशन को किसी भी हाल में रोकना नहीं चाहता।


अमेरिका अब भी सबसे आगे, लेकिन चीन की चालें तेज़

वैश्विक स्तर पर अमेरिका आज भी सबसे शक्तिशाली वायुसेना रखता है। F-22 और F-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर्स अमेरिका की तकनीकी बढ़त को दर्शाते हैं।
हालांकि, चीन अब सालाना 100 से ज्यादा J-20 लड़ाकू विमान बना रहा है, और J-10C जैसे विमानों की संख्या भी तेजी से बढ़ाई जा रही है।

अमेरिका की वायुसेना के पास सबसे ज्यादा विमान हैं, लेकिन उनमें से कई दशकों पुराने हैं। इसके उलट चीन के नए विमानों की औसत उम्र काफी कम है, और यही भविष्य में संतुलन बदलने का संकेत दे सकता है।


J-10C: ताइवान पर नजर: क्या J-10C बन सकता है चीन का हथियार?

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो J-10C उसमें अग्रिम भूमिका निभा सकता है। इसकी भारी तैनाती और उत्पादन क्षमता इसे एक फ्रंटलाइन फाइटर बनाती है।

लेकिन यह भी सच है कि ताइवान संघर्ष की स्थिति में J-10C को अमेरिका के आधुनिक फाइटर्स से सीधी टक्कर लेनी होगी — और यहां उसकी असल परीक्षा होगी।

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