Iran to India: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच ईरान ने भारत को संबोधित करते हुए एक अहम बयान दिया है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप-राजदूत मोहम्मद जवाद हुसैनी ने भारत से आग्रह किया है कि वह इज़रायल की आक्रामक नीतियों की सार्वजनिक रूप से निंदा करे और वैश्विक मंच पर दबाव बनाए. हुसैनी का यह बयान उस समय आया है जब इज़रायल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
भारत की भूमिका निर्णायक हो सकती है
हुसैनी ने भारत को वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज़ बताते हुए कहा कि ऐसे समय में जब क्षेत्रीय शांति खतरे में है, भारत जैसे देशों को निष्पक्ष और साहसी रुख अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा, अगर अक्टूबर 2023 में इज़रायल द्वारा गाजा पर हमास के खिलाफ किए गए हमलों की कड़ी आलोचना की जाती, तो शायद आज वह ईरान जैसे संप्रभु देश पर हमला करने की हिम्मत नहीं करता. उन्होंने भारत से अपील की कि वह पश्चिम एशिया में स्थिरता कायम करने की दिशा में ठोस पहल करे.
IAEA की भूमिका पर गंभीर आरोप
ईरानी राजनयिक ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि IAEA पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि ईरान में कोई सैन्य परमाणु कार्यक्रम नहीं चल रहा, फिर भी एजेंसी ने इज़रायल समर्थित रुख अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई को मौन समर्थन दिया. हुसैनी ने यह भी जोड़ा, ऐसे वैश्विक संस्थानों की जवाबदेही तय होना ज़रूरी है, वरना यह एकतरफा निर्णयों का माध्यम बनते जा रहे हैं.
परमाणु हथियार हमारी नीति का हिस्सा नहीं
हुसैनी ने दोहराया कि ईरान की सुरक्षा नीति में परमाणु हथियारों के लिए कोई स्थान नहीं है. उन्होंने यूरेनियम संवर्धन के आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताते हुए कहा कि कुछ वैश्विक शक्तियाँ इस बहाने ईरान में शासन परिवर्तन की योजना बना रही हैं. हमें अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों की आवश्यकता नहीं है. यह हमारी मूल नीति का हिस्सा है.
पाकिस्तान से सहयोग की उम्मीद
एक पत्रकार के सवाल पर, हुसैनी ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर विश्वास जताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान किसी भी तरह से इज़रायल के सैन्य प्रयासों में शामिल नहीं होगा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में सहयोगी भूमिका निभाएगा. हमारी कुछ क्षमताएं अब तक गोपनीय हैं”: ईरान की चेतावनी बातचीत के अंत में हुसैनी ने एक गंभीर चेतावनी दी. उन्होंने कहा, हमारे पास कुछ ऐसी रणनीतिक क्षमताएं हैं जिन्हें हमने अभी तक उजागर नहीं किया है. लेकिन ज़रूरत पड़ी तो हम इन्हें इस्तेमाल करने में नहीं हिचकिचाएंगे. इस बयान से साफ है कि ईरान किसी भी संभावित हमले या उकसावे के जवाब में निर्णायक कदम उठाने को तैयार है.
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