Israel Iran War: ईरान को बिना शर्त झुकना होगा, वरना अंजाम खतरनाक होगा! ट्रंप की चेतावनी

Iran Israel War

Israel Iran War: मध्य-पूर्व की जंग अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है. इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी लड़ाई में अब अमेरिका भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आया है. अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सीधी धमकी दी है. अब बिना शर्त आत्मसमर्पण करो, वरना अंजाम वही होगा जो सद्दाम हुसैन और गद्दाफी का हुआ था. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने अमेरिकी नागरिकों या सैनिकों पर कोई हमला किया तो अमेरिका का जवाब बेहद घातक होगा.

“खामेनेई का ठिकाना पता है, लेकिन अभी नहीं मारेंगे”

ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर बड़ा दावा करते हुए लिखा, “हमें अच्छी तरह मालूम है कि खामेनेई कहां हैं. वो हमारी पकड़ में हैं, लेकिन अभी हम उन्हें मारने नहीं जा रहे. हमारी सहनशीलता की भी एक सीमा है. अगर ईरान ने अमेरिकी नागरिकों या सैनिकों को नुकसान पहुंचाया, तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा.” इसके साथ ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया है. F-16, F-22 और F-35 जैसे अमेरिकी फाइटर जेट्स इस समय ईरानी आसमान में पूरी ताकत से डटे हुए हैं.

क्या होता है ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’?

बिना शर्त आत्मसमर्पण यानी ‘Unconditional Surrender’ का मतलब है कि हारने वाले देश को अपनी कोई भी शर्त रखने का अधिकार नहीं होता. उसे पूरी तरह विजेता की बात माननी पड़ती है— चाहे सेना खत्म करना हो, राजनीतिक सत्ता छोड़नी हो या अपने नेताओं को गिरफ्तार कराना हो. इस नीति का सबसे बड़ा उदाहरण द्वितीय विश्व युद्ध में देखने को मिला था जब अमेरिका ने जर्मनी, जापान और इटली से केवल बिना शर्त समर्पण ही स्वीकार किया था. जापान ने इस दबाव के बाद हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमलों के बाद आत्मसमर्पण कर दिया था.

इतिहास क्या कहता है?

बिना शर्त आत्मसमर्पण का फॉर्मूला अमेरिका पहले भी इस्तेमाल कर चुका है. सद्दाम हुसैन (2003): अमेरिका के दबाव के बावजूद सद्दाम ने समर्पण नहीं किया. नतीजा पकड़े गए और फांसी दे दी गई. मुअम्मार गद्दाफी (2011): सत्ता छोड़ने से इनकार किया, अंत में विद्रोहियों ने सरेआम घसीट-घसीटकर मार डाला. अब ट्रंप का संकेत साफ है. अगर खामेनेई नहीं झुकते तो उनका अंजाम भी ऐसा ही हो सकता है.

इजरायल-ईरान जंग: अब तक का अपडेट

13 जून से इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े हमले शुरू किए हैं. कई ईरानी परमाणु वैज्ञानिक और IRGC (ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स) के सीनियर अधिकारी मारे गए हैं. अब तक ईरान: 224 नागरिकों की मौत, 1,257 लोग घायल. इजरायल: 24 लोगों की मौत. ईरान का आरोप है कि इजरायल का यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है. ईरान का दावा है कि वह यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का पूरा हक रखता है.

क्या ईरान झुकेगा?

ईरान फिलहाल किसी भी दबाव में आता नहीं दिख रहा. तेहरान में सब कुछ सामान्य चल रहा है. बाजार, स्कूल, ऑफिस सब खुले हैं. स्थानीय लोगों का कहना है, “हम अमेरिका और इजरायल से डरते नहीं, हमारी एयर डिफेंस मजबूत है.” हालांकि जमीन पर हालात धीरे-धीरे बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं.

अगर खामेनेई नहीं माने तो आगे क्या?

अगर ईरान ट्रंप की ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की मांग नहीं मानता, तो अमेरिका के पास तीन बड़े विकल्प होंगे. टारगेटेड अटैक: खामेनेई, IRGC कमांडर्स और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया जा सकता है. सरकार बदलने की साजिश: अमेरिका समर्थक सत्ता लाने के लिए अंदरूनी बगावत को बढ़ावा दिया जा सकता है. फुल स्केल युद्ध: इराक और अफगानिस्तान की तरह सीधा जमीनी हमला हो सकता है.

अब सबकी नजरें खामेनेई पर

ईरान के सामने दो ही रास्ते हैं. या तो झुक जाए, या फिर अमेरिका और इजरायल के मिलिट्री प्रेशर का सीधा सामना करे. सवाल यह है कि खामेनेई इस चुनौती को कैसे लेंगे?

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Author

  • Akash Singh

    पत्रकारिता के इस क्षेत्र में पांच सालों में काफी कुछ सीखने मिला. खबरों को सटीक और सरलता से समझने का हुनर. राजनीति करने का नहीं लिखने का शौक. निरंतर नई चीजें सीखने का प्रयास और उसपर अमल करना यह सिलसिला यूं ही आगे भी चलता रहेगा.

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