Pakistan To America: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और विवादों को खत्म करने के लिए फिर से संवाद की कोशिशें तेज हो गई हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात करते हुए भारत के साथ कई अहम मुद्दों पर बातचीत की इच्छा जताई है. इस बातचीत का विवरण पाकिस्तान के सरकारी चैनल पीटीवी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से साझा किया है.
अमेरिका की मध्यस्थता में शांति की उम्मीद
शहबाज शरीफ ने बातचीत के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि ट्रंप के नेतृत्व और मार्को रुबियो की पहल ने भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम समझौते को सफल बनाने में मदद की है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए दोनों देशों के बीच खुली और सार्थक बातचीत जरूरी है.
फिर से चर्चा में कश्मीर मुद्दा
प्रधानमंत्री शरीफ ने साफ तौर पर कहा कि भारत के साथ बातचीत में जम्मू-कश्मीर का मसला भी शामिल होना चाहिए. उन्होंने बार-बार कहा कि इस क्षेत्रीय विवाद का समाधान केवल कूटनीति और बातचीत के जरिये ही हो सकता है. हालांकि, भारत की नीति रही है कि पाकिस्तान से संवाद आतंकवाद और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तक ही सीमित रहेगा. इस प्रस्ताव को कई विशेषज्ञ नई पहल के बजाय एक कूटनीतिक नाटक के रूप में देख रहे हैं.
ईरान-इज़राइल युद्ध और वैश्विक शांति की चिंता
बातचीत के दौरान शहबाज शरीफ ने ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष पर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह युद्ध वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है. उन्होंने अमेरिका से अनुरोध किया कि वह इस क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए सक्रिय भूमिका निभाए. पाकिस्तान ने भी इस दिशा में रचनात्मक सहयोग की पेशकश की है.
व्यापार और आतंकवाद: पाकिस्तान की प्रतिबद्धता
शहबाज शरीफ ने अमेरिका के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खनन और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को पारस्परिक लाभ के लिए साझेदारी करनी चाहिए. आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने पाकिस्तान की पूरी प्रतिबद्धता जताई. इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान की कोशिशों की प्रशंसा की और भरोसा दिलाया कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ हर संभव मदद करेगा. उन्होंने भारत-पाक संघर्ष विराम समझौते में पाकिस्तान की भूमिका की भी सराहना की.
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