Russia Ukraine War: थोड़ा लड़ने दीजिए, फिर कराएंगे शांति, अमेरिकी राष्ट्रपति का नया राग

Russia Ukraine War

Russia Ukraine War: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से वैश्विक राजनीति को चौंका दिया है. ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच किसी भी तरह की शांति स्थापना से पहले, दोनों देशों को कुछ समय तक एक-दूसरे से लड़ने देना चाहिए. यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह आगामी अमेरिकी चुनावों में शांति स्थापित करने को अपने प्रमुख वादों में गिनाते रहे हैं.

“बच्चों की तरह झगड़ते हैं रूस और यूक्रेन” Russia Ukraine War

व्हाइट हाउस में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष की तुलना दो छोटे बच्चों से की. उन्होंने कहा कि  “कभी-कभी बच्चों को थोड़ा लड़ने देना और फिर उन्हें अलग करना ज्यादा प्रभावी होता है.” ट्रंप के इस बयान को उनके पुराने बयानों के उलट देखा जा रहा है, क्योंकि वे पूर्व में युद्ध समाप्त कराने का दावा करते रहे हैं.

रूस-यूक्रेन को दी प्रतिबंधों की चेतावनी Russia Ukraine War

बैठक के दौरान ट्रंप ने रूस और यूक्रेन दोनों को सख्त लहज़े में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है तो वह दोनों देशों पर कठोर प्रतिबंध लगाने से पीछे नहीं हटेंगे. “अगर मुझे लगेगा कि यह युद्ध अब खत्म नहीं होने वाला, तो हम बेहद कड़े कदम उठाएंगे.” यह बयान साफ संकेत देता है कि ट्रंप राजनयिक दबाव के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबंधों को भी एक अहम हथियार के रूप में देख रहे हैं.

यूक्रेन के ड्रोन हमले और रूस का पलटवार Russia Ukraine War

हाल के घटनाक्रमों में यूक्रेन ने रूस के कई एयरबेसों को ड्रोन से निशाना बनाते हुए बमवर्षक विमानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. इसके जवाब में रूस ने यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में तीव्र हमले किए हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप की फोन पर बातचीत भी चर्चा में रही, जिसमें पुतिन ने स्पष्ट किया कि वह हमलों का जवाब देने में हिचकिचाएंगे नहीं.

क्या कहता है विश्लेषण? Russia Ukraine War

ट्रंप का यह बयान चुनावी रणनीति के तहत दिया गया “टेस्टिंग स्टेटमेंट” भी हो सकता है — जिसमें वे खुद को निर्णायक, कूटनीतिक और साहसी नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं. लेकिन आलोचकों का मानना है कि युद्ध जैसी मानवीय त्रासदी को ‘थोड़ा लड़ने देना’ जैसी भाषा में परिभाषित करना संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है.

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Author

  • Akash Singh

    पत्रकारिता के इस क्षेत्र में पांच सालों में काफी कुछ सीखने मिला. खबरों को सटीक और सरलता से समझने का हुनर. राजनीति करने का नहीं लिखने का शौक. निरंतर नई चीजें सीखने का प्रयास और उसपर अमल करना यह सिलसिला यूं ही आगे भी चलता रहेगा.

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