Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी युद्ध ने एक बार फिर कीव की जनता को दहशत में डाल दिया है. शनिवार तड़के रूसी सेना ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, जिससे राजधानी में धमाकों की आवाजें गूंज उठीं और शहर के कई हिस्सों में अफरा-तफरी मच गई. इस हमले में आठ नागरिक घायल हुए जबकि कई लोग डर के मारे अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में रात बिताने को मजबूर हो गए. यह हमला एक खास समय पर हुआ जब कुछ घंटे पहले ही रूस और यूक्रेन के बीच एक बड़े कैदी आदान-प्रदान का पहला चरण शुरू हुआ था, जिसमें दोनों पक्ष 1,000-1,000 सैनिकों और नागरिकों को रिहा करने पर सहमत हुए थे.
कीव सैन्य प्रशासन के अधिकारी तैमूर त्काचेंको ने बताया कि हमले के बाद राजधानी के चार जिलों में मिसाइलों और ड्रोन के मलबे गिरने से छह लोग घायल हुए और दो जगह आग लग गई. कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने नागरिकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि 20 से ज्यादा रूसी ड्रोन शहर की ओर बढ़ रहे हैं. ओबोलोन जिले में हमले से एक मॉल और एक आवासीय इमारत को नुकसान पहुंचा. राहत और बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं.
कैदी अदला-बदली में बढ़ा मानवीय भाव
इस बीच, शुक्रवार को रूस और यूक्रेन के बीच अब तक के सबसे बड़े कैदी आदान-प्रदान में 390 यूक्रेनी नागरिकों को रिहा किया गया. राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि सप्ताहांत में और भी रिहाइयां हो सकती हैं. रूस ने भी समान संख्या में अपने सैनिकों की रिहाई की पुष्टि की. बेलारूस की सीमा पर रिहा किए गए लोगों को उनके परिजन बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. इस भावुक मौके ने युद्ध की विभीषिका के बीच इंसानियत की चमक को दिखाया.
शांति की उम्मीदें फिर भी कमजोर
हालांकि कैदी अदला-बदली की यह पहल सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन युद्ध विराम की संभावनाएं फिलहाल कम ही नजर आ रही हैं. करीब 1,000 किलोमीटर लंबी युद्ध रेखा पर दोनों पक्षों के बीच लगातार भीषण संघर्ष जारी है. तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने इस कदम को ‘विश्वास निर्माण’ कहा, लेकिन क्रेमलिन ने शांति वार्ता के अगले दौर की अभी तक पुष्टि नहीं की. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक मसौदा प्रस्ताव का जिक्र किया, जो युद्ध के बाद स्थायी शांति का आधार बन सकता है. वहीं, यूरोपीय नेताओं ने पुतिन पर शांति प्रयासों में देरी करने और यूक्रेनी क्षेत्रों पर कब्जा बढ़ाने का आरोप लगाया है. इस्तांबुल में हुई बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच शांति की राह अब भी लंबी और मुश्किल बनी हुई है. इस जंग की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है और दुनिया की निगाहें आगे की घटनाओं पर टिकी हैं.
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