US Russia Talk: दुनिया यूक्रेन में शांति की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठी है, लेकिन पर्दे के पीछे एक और भूचाल पनप रहा है। अमेरिका और रूस के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत का दावा किया जा रहा है। एक तरफ व्लादिमीर पुतिन हैं, दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप। दोनों नेता शांति वार्ता के लिए आगे आए हैं और कह रहे हैं कि “बातचीत अच्छी चल रही है।” लेकिन इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का एक डीक्लासिफाइड (गोपनीयता से मुक्त) आकलन सामने आया है जिसने अमेरिकी सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है।
रिपोर्ट बताती है कि रूस चुपके से अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को न सिर्फ बढ़ा रहा है, बल्कि अब उसने हवा से हवा में मार करने वाली परमाणु-सशस्त्र मिसाइल भी तैनात कर दी है। ये वही हथियार हैं जो शीत युद्ध के बाद से विश्व राजनीति के मैदान में नजर नहीं आए थे।
US Russia Talk: बेलारूस बना रूस का ‘परमाणु लॉन्चपैड’
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अपने परमाणु सिद्धांत में संशोधन किया है, जिससे परमाणु हथियारों के उपयोग की शर्तों में ढील दी गई है। खास बात यह है कि बेलारूस, जो रूस का एक तरह से ‘सैटेलाइट स्टेट’ बन चुका है, वहां के सैनिकों को परमाणु हथियारों को संभालने की बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है।
साल 2023 से ही रूस ने बेलारूस में परमाणु हथियार तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अब जबकि अमेरिका-रूस के बीच शांति वार्ता की बातें हो रही हैं, ठीक उसी समय रूस का ये ‘परमाणु विस्तारवाद’ ट्रंप प्रशासन को बेचैन कर रहा है।
हवा में ही तबाही मचाने की तैयारी!
शीत युद्ध के बाद अमेरिका और रूस दोनों के पास हवा से हवा में मार करने वाली परमाणु मिसाइलें नहीं थीं। लेकिन अब रूस ने इस सन्नाटे को तोड़ा है। अमेरिकी खुफिया आकलन के मुताबिक, रूस एक नई पीढ़ी की एयर-टू-एयर न्यूक्लियर मिसाइल तैनात कर चुका है।
रिपोर्ट में मिसाइल के नाम का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह मिसाइल R-37M का न्यूक्लियर वर्जन हो सकता है। नाटो इसे AA-13 एक्सहेड के नाम से जानता है। यह मिसाइल बेहद लंबी दूरी तक टारगेट को भेद सकती है, और अगर इस पर परमाणु वारहेड लगाया गया है, तो इसका प्रभाव विनाशकारी होगा।
अमेरिका के लिए ‘पुरानी यादें’ ताजा
अमेरिका के पास भी एक समय पर ऐसी मिसाइल थी – GAR-11। इसे 1950 के दशक में बनाया गया था लेकिन 1970 के दशक में बंद कर दिया गया था। उस समय इन मिसाइलों को सोवियत बमवर्षक विमानों को रोकने के लिए तैयार किया गया था। अब जबकि ऐसे बमवर्षक विमानों की सक्रियता न के बराबर है, रूस की यह मिसाइल नीति अमेरिका को चौंका रही है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूस की एक तरह की मनोवैज्ञानिक जंग है — अपने विरोधियों को संदेश देना कि ‘हम अब भी परमाणु शक्ति के मामले में सबसे ऊपर हैं।’
US Russia Talk: ट्रंप की कूटनीति के लिए बड़ी चुनौती
वॉशिंगटन के अंदरखाने में ट्रंप समर्थक भी मान रहे हैं कि रूस की यह आक्रामक तैयारी उनकी डिप्लोमेसी को कमजोर कर सकती है। बातचीत की मेज पर बैठे पुतिन बाहर जाकर अगर परमाणु मिसाइलें तैनात कर रहे हैं, तो यह ‘ड्यूल गेम’ अमेरिका की रणनीति को अस्थिर कर सकता है।
बातचीत का एक पहलू दुनिया को दिखाने के लिए हो सकता है, और दूसरा पहलू वास्तविक भू-राजनीतिक वर्चस्व के लिए — और पुतिन शायद दोनों ही मोर्चों पर अपनी चाल चल चुके हैं।





