राष्ट्रपति नहीं, रियल एस्टेट एजेंट! अब आतंकी के साथ चाय, ट्रंप की हर चाल में बिजनेस क्यों दिखता है?

ट्रंप की डिप्लोमेसी या डार्क डील? – काले चश्मे के पीछे छुपे कितने सच?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं — और इस बार वजह कोई ट्वीट नहीं, बल्कि एक ‘टेबल टॉक’ है, जो उन्होंने मध्य पूर्व में एक ऐसे शख्स के साथ की, जिसे खुद अमेरिका ने कभी मोस्ट वांटेड टेररिस्ट घोषित किया था।

मामला सीधा है, लेकिन असर गहरा: ट्रंप ने सीरिया के नए नेता अहमद अल-शरा से मुलाकात की — वही अल-शरा जिन्हें दुनिया HTS के पूर्व कमांडर और कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े चेहरे के तौर पर जानती है।

कौन हैं अहमद अल-शरा?

एक वक्त था जब वो अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से पहचाने जाते थे — हयात तहरीर अल-शाम (HTS) जैसे आतंकी संगठन के सरगना, जो सीरिया में अल-कायदा की शाखा माने जाते थे। अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने HTS को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है, और अल-शरा पर अमेरिका ने खुद $10 मिलियन का इनाम घोषित किया था।

लेकिन आज? वही अल-शरा सूट-बूट में नजर आ रहे हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकतंत्र और विकास की बातें कर रहे हैं — और सबसे चौंकाने वाली बात ये कि अब उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप बैठकर चाय-सलाह कर रहे हैं।

अचानक दोस्ती कैसे?

ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही रियाद में एक निवेश मंच पर यह बयान दिया था कि “अमेरिका अब मध्य पूर्व में युद्ध नहीं, व्यापार की भाषा बोलेगा।” अगले ही दिन उन्होंने अल-शरा से गुप्त मुलाकात कर न सिर्फ सीरिया से प्रतिबंध हटाए, बल्कि नए समझौतों की शुरुआत की बात भी छेड़ दी।

सवालों के घेरे में ट्रंप की नीति

यह कदम अमेरिका की उस लंबी विदेश नीति पर सवाल खड़े कर रहा है, जिसमें आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात होती थी। क्या अब व्यापार के नाम पर नैतिक सीमाएं लांघी जा रही हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप पर सऊदी अरब और कतर जैसे देशों का सीधा दबाव है, जो सीरिया के नए नेतृत्व से सॉफ्ट अप्रोच चाहते हैं। ऐसे में यह मुलाकात नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि डील डिप्लोमेसी का हिस्सा कही जा रही है।

क्या अमेरिका का दुश्मन अब उसका बिजनेस पार्टनर बन चुका है?

इस मुलाकात ने अमेरिका की नैतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ के नाम पर ‘एथिक्स लास्ट’ की राह पर बढ़ चले हैं? क्या आतंकवाद से लड़ने वाली ताकतें अब प्रॉफिट शेयरिंग की सोच में उलझ चुकी हैं?

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  • Aaj Ki Baat Desk

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