What Is Mutah Nikah: क्या होता है मुताह निकाह? मिलती हैं 15 दिनों की बीवियां

What Is Mutah Nikah

What Is Mutah Nikah: आज के दौर में जब विवाह एक स्थायी संस्था मानी जाती है, दुनिया के एक हिस्से में ऐसी शादियां भी होती हैं जो महज कुछ दिनों की होती हैं—बिना भावनाओं के, बिना किसी दीर्घकालिक संबंध की अपेक्षा के. ये शादियां होती हैं कुछ दिनों के लिए, और इनका मकसद होता है. पैसा. हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया के पुंकाक क्षेत्र की, जहां 15-20 दिनों के लिए ‘बीवियां’ किराए पर मिलती हैं.

अस्थायी विवाह की प्रथा मुताह निकाह (What Is Mutah Nikah)

इस तरह के विवाह इस्लाम धर्म की एक प्राचीन परंपरा से जुड़े हैं जिसे “मुताह निकाह” कहा जाता है. मुताह का मतलब होता है ‘आनंद उठाना’, और यह निकाह अस्थायी होता है. एक तय अवधि के लिए. इस प्रथा की शुरुआत शिया समुदाय में हुई थी, जहां पुरुष और महिला आपसी सहमति से एक निश्चित समय तक शादी करते थे और समय पूरा होते ही वह विवाह स्वत: समाप्त हो जाता था. हालांकि अब यह प्रथा अधिकतर देशों से विलुप्त हो चुकी है, लेकिन इंडोनेशिया जैसे कुछ गिने-चुने देशों में यह आज भी ज़िंदा है—वो भी एक इंडस्ट्री के रूप में.

इंडोनेशिया में मुताह का ट्रेंड

इंडोनेशिया, खासकर उसका पुंकाक इलाका, इन दिनों इस तरह की शादियों का बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां गरीब परिवारों की लड़कियां, जिन्हें अच्छी नौकरियां नहीं मिल पातीं, पैसे के बदले विदेशी पुरुषों (मुख्यतः मध्य-पूर्व से आने वाले पर्यटक) के साथ 5 से 20 दिनों तक अस्थायी विवाह करती हैं. इसे ‘प्लेजर मैरिज’ भी कहा जाता है.

दलालों और एजेंट्स का नेटवर्क

यह प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित हो चुकी है कि अब इसमें एजेंट और स्थानीय दलाल शामिल हो गए हैं. ये एजेंट एक महीने में दर्जनों शादियां करवा देते हैं. वे पर्यटकों को स्थानीय महिलाओं से मिलवाते हैं, एक छोटा-सा अनौपचारिक निकाह कराया जाता है और दुल्हन की कीमत तय होती है. यह शादी सिर्फ कुछ दिनों की होती है और फिर समाप्त हो जाती है.

यह कारोबार बन गया है

प्लेजर मैरिज अब एक व्यवस्थित कारोबार का रूप ले चुकी है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और विदेशी अखबारों जैसे लॉस एंजिल्स टाइम्स ने इस पर विस्तार से रिपोर्टिंग की है. उन्होंने बताया कि यह इंडस्ट्री अब इतना फैल चुकी है कि इसमें कई कंपनियां और टूर एजेंसियां भी शामिल हो गई हैं.

13 साल की उम्र में शादी, फिर सिलसिला चलता गया

LA टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 वर्षीय इंडोनेशियाई महिला काहाया ने बताया कि उसने अब तक 15 से अधिक बार इस तरह की शादी की है. काहाया को पहली बार उसके दादा-दादी ने 13 साल की उम्र में अस्थायी विवाह के लिए मजबूर किया था. उस समय उसे नहीं पता था कि यह उसके जीवन को कैसा मोड़ देगा. अब वह हर विवाह से करीब 300 से 500 डॉलर तक कमा लेती है, जिससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती है.

लेकिन ये चमकदार नहीं, कड़वी सच्चाई है

हालांकि यह सुनने में आकर्षक लगे कि किसी महिला को हर महीने कुछ हजार डॉलर मिलते हैं, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई उतनी ही कड़वी है. कई बार उन्हें यौन शोषण, हिंसा और अपमान का सामना करना पड़ता है. उन्हें सामाजिक तिरस्कार का भी डर रहता है. काहाया जैसे कई महिलाएं इसे जबरन झेलती हैं क्योंकि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होता.

महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल

इन अस्थायी विवाहों को लेकर अब काफी सवाल खड़े होने लगे हैं. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और महिला आयोगों ने इस प्रथा को महिलाओं के शोषण का जरिया बताया है. खासकर जब यह ‘शादी’ एक समझौता भर बन जाए और महिला को वस्तु की तरह इस्तेमाल किया जाए.

ईरान-इराक में भी लेकिन सिर्फ परंपरा तक

ईरान और इराक जैसे शिया बहुल देशों में भी मुताह निकाह की अनुमति है, लेकिन वहां यह आमतौर पर स्थानीय स्तर तक सीमित रहती है, पर्यटकों के लिए नहीं. यहां भी यह परंपरा धार्मिक भावनाओं से जुड़ी मानी जाती है. इसका इस्तेमाल किसी महिला के साथ अस्थायी रिश्ता बनाकर बाद में अलग हो जाने के उद्देश्य से नहीं किया जाता.

प्राचीन अरब समाज से शुरुआत

मुताह निकाह की शुरुआत उस दौर से जुड़ी है जब अरब समाज में पुरुष लंबी यात्राओं पर जाया करते थे. यात्रा के दौरान शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वे अस्थायी विवाह करते थे. यह उस समय सामाजिक रूप से स्वीकार्य था, लेकिन आज के समय में जब महिला अधिकारों की बात होती है, इस प्रथा की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े होते हैं.

भारत में भी था इसका इतिहास

भारत में भी जब मुगल साम्राज्य था, उस दौरान मुताह निकाह का चलन था. मुगलों के हरम में कई महिलाएं इसी व्यवस्था के तहत रखी जाती थीं. लेकिन धीरे-धीरे भारतीय समाज में यह प्रथा समाप्त होती चली गई और आज यह महज एक ऐतिहासिक संदर्भ भर रह गई है.

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Author

  • Akash Singh

    पत्रकारिता के इस क्षेत्र में पांच सालों में काफी कुछ सीखने मिला. खबरों को सटीक और सरलता से समझने का हुनर. राजनीति करने का नहीं लिखने का शौक. निरंतर नई चीजें सीखने का प्रयास और उसपर अमल करना यह सिलसिला यूं ही आगे भी चलता रहेगा.

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